हॉर्मुज में तैनात अमेरिकी सैनिकों की भूख का सच और पीट हेगसेथ की सफाई

हॉर्मुज में तैनात अमेरिकी सैनिकों की भूख का सच और पीट हेगसेथ की सफाई

हॉर्मुज जलडमरूमध्य यानी स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में तैनात अमेरिकी नौसैनिकों के पास खाने के लाले पड़े हैं। सोशल मीडिया पर ये खबर आग की तरह फैली और देखते ही देखते इसने पेंटागन की नींद उड़ा दी। जब मामला हाथ से निकलने लगा तो अमेरिका के नए रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को खुद सामने आकर सफाई देनी पड़ी। लेकिन क्या ये वाकई सिर्फ एक अफवाह है या दुनिया की सबसे ताकतवर सेना के लॉजिस्टिक्स में कोई बड़ा छेद हो गया है?

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज कोई साधारण जगह नहीं है। यहाँ तैनात होना मतलब चौबीसों घंटे तनाव के साये में रहना। ईरान की नाक के नीचे चल रहे इस ऑपरेशन में अगर सैनिकों को बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिलेंगी तो ये सीधे तौर पर अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बन जाता है। हेगसेथ का कहना है कि सब कुछ ठीक है पर हकीकत की परतें कुछ और ही इशारा कर रही हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल दावे और सैनिकों का दर्द

इंटरनेट पर कुछ ऐसी तस्वीरें और रिपोर्ट्स तैर रही हैं जिनमें दावा किया गया कि हॉर्मुज में तैनात जहाजों पर राशन खत्म हो रहा है। दावा यहाँ तक किया गया कि सैनिकों को दिन में सिर्फ एक बार खाना मिल रहा है या उन्हें एक्सपायर्ड पैकेट बंद खाने (MREs) पर गुजारा करना पड़ रहा है।

जब ये खबरें वायरल हुईं तो लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया कि क्या अरबों डॉलर का बजट रखने वाली सेना अपने जवानों का पेट भी नहीं भर पा रही? हेगसेथ ने इन दावों को पूरी तरह खारिज किया। उन्होंने इसे "दुश्मन का प्रोपेगेंडा" करार दिया। उनका तर्क है कि ये खबरें अमेरिकी सेना का मनोबल गिराने के लिए जानबूझकर फैलाई जा रही हैं।

ईरान के पास तैनात इन जहाजों पर रसद की सप्लाई चेन बहुत जटिल होती है। अगर एक भी सप्लाई शिप में देरी होती है तो उसका असर किचन पर पड़ता है। पर इसका मतलब ये नहीं कि वहां अकाल पड़ा है। हेगसेथ ने जोर देकर कहा कि सेना के पास पर्याप्त भंडार है और लॉजिस्टिक्स में कोई समस्या नहीं है।

पीट हेगसेथ के सामने पहली बड़ी चुनौती

पीट हेगसेथ के लिए ये विवाद एक अग्निपरीक्षा जैसा है। राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकाल में रक्षा मंत्री का पद संभालने के बाद ये उनके सामने आई पहली बड़ी मीडिया क्राइसिस है। हेगसेथ खुद एक पूर्व सैनिक रहे हैं। वो जानते हैं कि सेना में "फूड एंड फ्यूल" की अहमियत क्या है।

उनका कहना है कि उन्होंने खुद कमांडरों से बात की है। उनके मुताबिक जहाजों पर मेनू थोड़ा सीमित जरूर हुआ होगा क्योंकि ये एक एक्टिव कॉम्बैट जोन है पर भुखमरी जैसी स्थिति बिल्कुल नहीं है। हेगसेथ की छवि एक सख्त और सीधे बात करने वाले नेता की है। वो डिप्लोमैटिक भाषा के बजाय सीधे प्रहार करने में विश्वास रखते हैं। उन्होंने मीडिया के एक वर्ग पर भी निशाना साधा जो बिना पुष्टि के ऐसी खबरें चला रहे थे।

हॉर्मुज का रणनीतिक महत्व और बढ़ता तनाव

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया का वो कोना है जहाँ से पूरी दुनिया का तेल गुजरता है। यहाँ अमेरिका की मौजूदगी ईरान को चुनौती देने के लिए है। अगर यहाँ तैनात सैनिकों के बीच असंतोष पैदा होता है तो इसका सीधा फायदा ईरान जैसे देशों को होगा।

अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े (5th Fleet) की जिम्मेदारी इस इलाके में शांति बनाए रखना है। इन जहाजों पर हजारों की संख्या में जवान होते हैं। इन्हें खिलाना-पिलाना कोई छोटा काम नहीं है। एक एयरक्राफ्ट कैरियर पर रोजाना करीब 18,000 मील (भोजन) तैयार किए जाते हैं। अगर सप्लाई चेन में 1% की भी गड़बड़ी आती है तो वो खबर बन जाती है।

क्या रसद की कमी के पीछे बजट का खेल है?

रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि ये विवाद सिर्फ खाने तक सीमित नहीं है। ये असल में पेंटागन के अंदर चल रही खींचतान का नतीजा हो सकता है। नए प्रशासन के आने के बाद बजट की समीक्षा हो रही है। कुछ लोग इसे "कोल्ड वॉर" की तरह देख रहे हैं जहाँ विभाग अपनी जरूरतों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखा रहे हैं ताकि ज्यादा फंड मिल सके।

वहीं दूसरी ओर ये भी सच है कि मिडिल ईस्ट में लाल सागर और हॉर्मुज के आसपास अमेरिकी जहाजों पर दबाव बढ़ा है। हुती विद्रोहियों और ईरान समर्थित समूहों की सक्रियता की वजह से जहाजों को लंबे समय तक समुद्र में रहना पड़ रहा है। इससे पोर्ट विजिट्स कम हो गई हैं। जब जहाज बंदरगाह पर नहीं जाता तो ताजा सब्जियां और मीट मिलना मुश्किल हो जाता है।

क्या वाकई सैनिकों को भूखा रखा जा सकता है?

ईमानदारी से कहें तो अमेरिकी सेना जैसी संस्था में ऐसा होना लगभग नामुमकिन है। उनके पास दुनिया का सबसे मजबूत सप्लाई नेटवर्क है। फिर भी "कॉम्बैट थकान" एक बड़ी समस्या है। जब जवान महीनों तक घर से दूर समुद्र के बीच रहते हैं तो खाने की क्वालिटी में जरा सी गिरावट भी उन्हें बड़ी लगने लगती है।

सोशल मीडिया के दौर में अब हर सैनिक के पास फोन है (हालांकि संवेदनशील क्षेत्रों में पाबंदी होती है)। जरा सी शिकायत भी अब सीधे ग्लोबल हेडलाइन बन जाती है। हेगसेथ ने साफ किया कि अगर कहीं कोई कमी पाई गई तो वो खुद इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की क्लास लेंगे।

आगे क्या होगा और क्या है हकीकत

इस पूरे मामले से एक बात तो साफ है कि पेंटागन अब सोशल मीडिया की खबरों को नजरअंदाज नहीं कर सकता। हेगसेथ को अपनी सफाई के साथ-साथ अब ग्राउंड जीरो पर कुछ ठोस बदलाव भी दिखाने होंगे। सिर्फ बयान देने से काम नहीं चलेगा। अगर आने वाले दिनों में और भी सैनिक या उनके परिवार वाले ऐसी शिकायतें करते हैं तो हेगसेथ के लिए अपनी कुर्सी बचाना मुश्किल हो जाएगा।

हकीकत शायद इन दो चरमों के बीच कहीं है। न तो वहां भुखमरी है और न ही सब कुछ एकदम परफेक्ट है। तनावपूर्ण माहौल और बढ़ते ऑपरेशंस की वजह से सप्लाई चेन पर दबाव है। इसे मैनेज करना अब नई लीडरशिप की जिम्मेदारी है।

अगर आप इस क्षेत्र की गतिविधियों पर नजर रखना चाहते हैं तो आधिकारिक मिलिट्री प्रेस रिलीज और स्वतंत्र रक्षा विश्लेषकों की रिपोर्ट्स को क्रॉस-चेक करते रहें। केवल वायरल ट्वीट्स के आधार पर राय बनाना खतरनाक हो सकता है। आने वाले हफ्तों में पेंटागन की सप्लाई चेन की ऑडिट रिपोर्ट इस मामले में और पारदर्शिता ला सकती है।

RL

Robert Lopez

Robert Lopez is an award-winning writer whose work has appeared in leading publications. Specializes in data-driven journalism and investigative reporting.